कम उम्र में बाल झड़ने के कारण

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बालों का झड़ना एक बहुत सामान्य सी समस्या है जिसका सामना लगभग हरेक व्यक्ति करता है। यह समस्या किशोरों से लेकर वृद्ध जनों तक में भी पाई जाती है। बालों का झडना वयस्कों या वृद्धों में सामान्य सी बात है पर किशोरों में बालों के झड़ने की समस्या को सामान्य नहीं माना जाता है क्योंकि किशोर उम्र के दौरान बाल विकास की अवस्था में रहते हैं पर दवाई या किसी बीमारी के कारण किशोरों में भी बाल झडने की समस्या हो सकती है। बालों का झडना एक ऐसी समस्या है जिसमें कई चीजें बालों के झडने की समस्या को बढाने का काम करती है और बाल गिरने की संख्या सामान्य से अधिक होती है इसलिए यह एक बीमारी बन जाती है। अगर आपको महसूस होता है कि आपके बाल बहुत अधिक मात्रा में झड़ रहें हैं तो आप किसी स्किन स्पेशलिस्ट से मिल सकते हैं जिससे कि कम उम्र में बाल झड़ने के कारण का आसानी से पता चल सके और डॉक्टर से अपनी समस्या का जिक्र भी कर सके जिससे डॉक्टर आपको इसका सही ईलाज बता सकें।

कम उम्र के पुरूषों में बाल झड़ने के कारण

जब गंजेपन या हेयरफॉल की बात आती है, तो हम अधिकतर बूढ़े लोगों की ही कल्पना करते है पर किशोर लड़कों में भी कम उम्र में बाल झड़ने के कारण नहीं पता चल पाता और इसके समस्या बनने की बहुत अधिक संभावना होती है। अगर आप यह महसूस करते है कि आपके बाल बहुत अधिक झड़ रहें हैं तो सबसे जरुरी हो जाता है कम उम्र में बाल झड़ने के कारण का पता लगाना है जिसकी वजह से बाल इतनी तेजी से झड़ते हैं।

आइए कम उम्र में बाल झड़ने के कारण के बारे में जानते है:

अच्छा आहार नहीं खाना – कम उम्र में बाल झड़ने के कारण में स्वस्थ आहार का सेवन नकरना भी शामिल है। अनुचित आहार का सेवन किशोरों में बालों के झड़ने के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है क्योंकि उचित पोषण की कमी होने के कारण बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और बाल झड़ने की सा समस्या बढ़ जाती है।

स्कैल्प में दाद होना – यह स्कैल्प पर एक फंगल इंफेक्शन के रूप में होता है और इसे टिनिया कैपिटिस के रूप में भी जाना जाता है जोकि समय पर इलाज न मिलने के कारण कम उम्र में बाल झड़ने के कारण बन सकता है।

एलोपेसिया एरीटा – कई ऐसे मामले आते हैं जहां कम उम्र के किशोर एलोपेसिया एरीटा से पीड़ित हो सकते हैं जिसके कारण बाल बहुत तेजी से गिरने लगते हैं और सामान्य सा दिखने वाला व्यक्ति बहुत ही कम दिनों में गंजा बन जाता है। एलोपेसिया एरीटा का इलाज किया गए सभी मामलों में लगभग 20% मामले 16 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों के होते हैं। जिससे हम कह सकते हैं कि एलोपेसिया एरीटा कम उम्र में बाल झड़ने के कारण में प्रमुख है।

विभिन्न बिमारियों के कारण बालों झड़ना – मधुमेह, थायराइड, ल्यूपस आदि कई ऐसी बिमारियां हैं जो किसी व्यक्ति में कम उम्र में बाल झड़ने के कारण बन सकती हैं। पर किशोरों में ये स्थितियां बहुत अधिक नहीं पाई जाती हैं।

ट्रिकोटिलोमेनिया – ट्रिकोटिलोमेनिया भी कम उम्र में बाल झड़ने के कारण में प्रमुख है। यह एक बहुत ही दुर्लभ मनोवैज्ञानिक स्थिति है जहां किसी व्यक्ति को अपने बालों को खींचने का मन होता है या वह व्यक्ति बार बार अपने बालों को खींचता है। जिसकी वजह से सिर पर हेयरफॉल के पैच बनने लगते हैं। लड़कों की तुलना में लड़कियों में यह स्थिति ज्यादा पाई जाती है पर लड़कों में भी इसके कई मामले पाए जाते हैं।

ट्रैक्शन एलोपेसिया – यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें कोई व्यक्ति अपने बालों को एक ही दिशा में खींचता है और बाल इसकी वजह से बाल कमज़ोर होने लगते हैं। पोनीटेल एक ऐसी ही स्थिति होती है।

एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया – यह मेल पैटर्न हेयर फॉल के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसके कारण सिर से बाल धीरे-धीरे और स्थायी रूप से झड़ने लगते हैं। कई व्यक्तियों में यह स्थिति उनकी किशोरावस्था के समय से ही शुरू हो सकती है। पर यह बहुत कम लोगों को ही होती है क्योंकि इससे 15-17 वर्ष के सिर्फ 16% लड़के ही प्रभावित होते हैं।

दवाएं – कुछ दवाईयों का साइड इफेक्ट होता है जिसको किसी के भी बाल झड़ सकते हैं जैसे कैंसर के ईलाज की दवाएं, विटामिन ए डेरिवेटिव, एंटीहाइपरलिपिडेमिक दवाएं, एंटीपीलेप्टिक दवाएं आदि। इन दवाओं में एम्फ़ैटेमिन होते हैं जोकि किशोरों में बालों के झड़ने की समस्या को बढाने का काम करता है। पर यह बीमारी किशोर लड़कों में बहुत कम पाई जाती है।

कम उम्र की लड़कियों में बालों के झड़ने के सामान्य कारण

किशोर महिलाओं या बहुत ही कम उम्र की लड़कियों में बालों के झड़ने के कई कारण होते हैं जैसे कि –

हार्मोन का संतुलित होना- युवा होते समय, हार्मोन अत्यधिक शारीरिक परिवर्तन का कारण बनते हैं और इसी की वजह से कई किशोर लड़कियों को बालों के झड़ने की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है जिससे हम कह सकते हैं कि लड़कियों में हार्मोन का असंतुलित होना कम उम्र में बाल झड़ने के कारण में प्रमुख है।

कई तरह की दवाएं – मुंहासों के लिए ओरल रेटिनोइड्स, ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव विदड्रॉल आदि जैसी दवाएं बालों के झड़ने का कारण बन सकती हैं।

ओवर स्टाइलिंग- ऐसे हेयर स्टाइल जो बालों के स्ट्रैंड पर बहुत अधिक प्रेशर डालते हैं, बालों के झड़ने का कारण बनते हैं। हेयर डाई में मौजूद पैराफेनिलेनेडियम (पीपीडी) या अमोनिया जैसे केमिकल बालों को नुकसान पहुंचाते हैं। वे स्कैल्प के एलर्जी डार्माटाइटिस का कारण बन सकते हैं जोकि बालों के झड़ने का कारण बनता है।

उचित आहार न लेना – पौष्टिक आहार की कमी भी किसी के भी बालों की मजबूती को प्रभावित कर सकती है। सभी आवश्यक पोषक तत्वों को अपने भोजन में प्रतिदिन शामिल करने से बालों को पर्याप्त पोषण मिल सकता है और बाल गिरने की समस्या से भी निजात मिल सकती है।

प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण बालों का झडना- कई प्राकृतिक स्थितियां भी कम उम्र में बाल झड़ने के कारण बनने का काम करती हैं। कई बार प्रदूषण से संपर्क के कारण, धूप में बहुत अधिक रहने के कारण या नमी की कमी के कारण भी कम उम्र की लड़कियों में बालों के झड़ने की समस्या हो सकती है।

कम उम्र बालों के झड़ने की समस्या के शुरुआती लक्षण

बालों के झड़ने की समस्या का शुरुआती दौर में पता लगाने से इसके ठीक होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है। कम उम्र में बालों के झड़ने के निम्न लक्षण निम्नलिखित बताए गए हैं –

हेयरलाईन का घटना- बालों की घटती हुई हेयरलाइन एक ऐसी स्थिति है जहां व्यक्ति के सिर के ऊपरी हिस्से में से बाल झड़ने शुरू हो जाते हैं। इसे विडो पीक के नाम से भी जाना जाता है।

बालों में खुजली और इंफेक्शन होना – खुजली और इंफेक्शन का बालों के झड़ने से सीधा संबंध तो नहीं पाया जाता है पर डैंड्रफ, सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस जैसी कई स्थितियां बालों के झड़ने का कारण बन सकती हैं।

पतले बालों का एक बार फिर से बढ़ना – बालों के झड़ने के एकदम शुरू के स्टेज में देखेंगे कि झड़ने के बाद कुछ बाल दुबारा से उग आते हैं हालांकि दुबारा उगे हुए बाल बहुत पतले और छोटे होते हैं। ये बाल छोटे होते चले जाते हैं।

कम उम्र में बालों के झड़ने का इलाज

कम उम्र में बाल झड़ने की समस्या से व्यक्ति बहुत अधिक परेशान हो उठता है और इसका इलाज ढूंढने की कोशिश करने लगता है। इस आधुनिक समय में कई तकनीकें हैं जो कम उम्र में बालों के झड़ने की समस्या का इलाज कर सकती है। इन्हीं में से कुछ तकनीकों के विषय में बताया गया है –

  • पीआरपी
  • मिनोक्सिडिल

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